AI से डर नहीं, दिशा चाहिए: तकनीकी क्रांति का नया दौर

अब AI का जमाना है और स्वाभाविक है कि लोग चिंतित हों। कई लोगों को लगता है कि नौकरियाँ खत्म हो जाएंगी, बेरोज़गारी बढ़ेगी और मिडिल क्लास संकट में आ जाएगा। लेकिन इतिहास गवाह है कि हर नई तकनीक शुरुआत में डर पैदा करती है, फिर वही अवसर बन जाती है।
कंप्यूटर क्रांति का दौर
1980 के दशक में जब भारत में कंप्यूटर आए, तब भी यही आशंका थी कि कंपोज़िटर, टाइपिस्ट और कई दफ्तरों के कर्मचारी बेरोज़गार हो जाएंगे। लेकिन हुआ क्या?
कंप्यूटर ने काम को आसान बनाया, नए कौशल की मांग बढ़ी और आईटी सेक्टर ने लाखों नौकरियाँ पैदा कीं।
पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के दौर में कंप्यूटर भारत की दहलीज पर आया। उसी दौर ने आगे चलकर हैदराबाद, बेंगलुरु, चेन्नई और गुरुग्राम जैसे शहरों को हाई-टेक हब बना दिया।
AI समिट और वैश्विक परिदृश्य
दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित AI समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि AI से भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है।
इस समिट में मुकेश अंबानी ने AI क्षेत्र में 10 लाख करोड़ रुपये के निवेश की घोषणा की।
साथ ही सुंदर पिचाई और सैम आल्टमैन ने भी AI को भविष्य की दिशा बताया।
AI: रोजगार खत्म करेगा या बदलेगा?
सच यह है कि AI कुछ पारंपरिक नौकरियाँ कम करेगा, लेकिन उससे कहीं अधिक नई भूमिकाएँ पैदा होंगी:
- डेटा एनालिस्ट
- AI ट्रेनर
- रोबोटिक्स इंजीनियर
- साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ
- डिजिटल कंटेंट और क्रिएटिव इंडस्ट्री
जैसे कंप्यूटर ने टाइपिस्ट की जगह ली, लेकिन सॉफ्टवेयर इंजीनियर, वेब डेवलपर और ऐप डिजाइनर बनाए।
स्वास्थ्य और सुविधा में क्रांति
भारत में आज भी डॉक्टरों की कमी है। AI आधारित रोबोट बीमारियों की शुरुआती पहचान और अस्पताल प्रबंधन में मदद कर सकते हैं।
जो काम इंसान कई घंटों में करता है, AI उसे मिनटों में कर सकता है। इससे मानव मस्तिष्क नए शोध और आविष्कार में लग सकता है।
भविष्य: AI के बाद का AI
औद्योगिक क्रांति से लेकर डिजिटल क्रांति तक, हर बदलाव ने मानव क्षमता को विस्तार दिया है।
AI मनुष्य का विकल्प नहीं, उसका उपकरण है। मशीनें सामान्यीकरण करती हैं, लेकिन मौलिक सोच, भावनाएँ और विशिष्ट रचनात्मकता सिर्फ इंसान के पास है।
AI से घबराने की नहीं, उसे समझकर अपनाने की जरूरत है।
जो कौशल बढ़ाएगा, वही आगे बढ़ेगा।
तकनीक कभी अंत नहीं लाती, वह नई शुरुआत करती है।





