ईशा महाशिवरात्रि 2026 में ‘भव्य भारत भूषण’ सम्मान की शुरुआत, राष्ट्र-निर्माताओं को किया गया सम्मानित

तमिलनाडु के कोयंबटूर स्थित ईशा योग केंद्र में 33वें महाशिवरात्रि उत्सव का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस विशेष रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान सद्गुरु और रक्षा मंत्री ने पहली बार ‘भव्य भारत भूषण’ पुरस्कार प्रदान कर विभिन्न क्षेत्रों में असाधारण योगदान देने वाले व्यक्तित्वों को सम्मानित किया।
इस पहल का उद्देश्य उन लोगों को सम्मान देना है जिन्होंने अपने समर्पण, दृष्टि और कार्यों के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह सम्मान प्रतिवर्ष कॉरपोरेट, कला एवं साहित्य, खेल, सामुदायिक सेवा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा संस्कृति जैसे क्षेत्रों में दिया जाएगा।
सम्मानित किए गए प्रमुख व्यक्तित्वों में वैज्ञानिक नंबी नारायणन और किरण कुमार को भारत की तकनीकी प्रगति में योगदान के लिए सम्मानित किया गया। प्रसिद्ध भरतनाट्यम नृत्यांगना अलारमेल वल्ली को भारतीय शास्त्रीय नृत्य परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए सम्मान मिला। शास्त्रीय वायलिन वादक एन. राजम को संगीत क्षेत्र में योगदान के लिए सम्मानित किया गया। इतिहासकार विक्रम संपत को भारतीय इतिहास के शोधपूर्ण प्रस्तुतीकरण के लिए सम्मान प्रदान किया गया। बैडमिंटन खिलाड़ी साइना नेहवाल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में भारतीय सशस्त्र बलों के तीन वरिष्ठ अधिकारियों को ऑपरेशन सिंदूर में उनके साहस और नेतृत्व के लिए विशेष सम्मान दिया गया। इनमें एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा, लेफ्टिनेंट जनरल ए.वी.एस. राठी और वाइस एडमिरल आर.वी. गोखले शामिल हैं।
सद्गुरु ने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्र केवल भूमि का नाम नहीं, बल्कि उसके लोगों से निर्मित होता है। प्रेरित और समर्पित नागरिक ही भव्य भारत का निर्माण कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि आदियोगी अतीत के नहीं, बल्कि भविष्य के हैं और उनका संदेश मानव कल्याण की तकनीक पर आधारित है।
महाशिवरात्रि का यह आयोजन 25 भाषाओं में प्रसारित किया गया और दुनिया भर में करोड़ों लोगों ने इसे देखा। कार्यक्रम के दौरान पूरी रात विभिन्न आध्यात्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित की गईं। सद्गुरु ने घोषणा की कि इस वर्ष के अंत तक ईशा योग केंद्र में काल भैरव की प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी। साथ ही 18 फरवरी 2026 तक इनर इंजीनियरिंग ऑनलाइन कार्यक्रम निःशुल्क उपलब्ध कराने की भी घोषणा की गई।





