नसीमुद्दीन सिद्दीकी समाजवादी पार्टी में शामिल, अखिलेश यादव बोले- पीडीए को मिली मजबूती

उत्तर प्रदेश | उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आया है। वरिष्ठ नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए हैं। लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम में सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने उन्हें औपचारिक रूप से पार्टी की सदस्यता दिलाई। इस मौके पर बड़ी संख्या में नेताओं और कार्यकर्ताओं की मौजूदगी ने कार्यक्रम को खास बना दिया।
बताया जा रहा है कि नसीमुद्दीन सिद्दीकी के साथ 15,000 से अधिक नेताओं और समर्थकों ने भी समाजवादी पार्टी का दामन थामा। अखिलेश यादव ने मंच पर उनका स्वागत माला पहनाकर किया और उन्हें स्मृति चिन्ह के साथ अहिल्याबाई की तस्वीर भेंट की। पार्टी इसे अपने पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समीकरण को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम मान रही है।
अपने संबोधन में अखिलेश यादव ने कहा कि बहुजन समाज और समाजवादी विचारधारा के बीच रिश्ते लगातार मजबूत हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि पीडीए केवल एक राजनीतिक नारा नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और प्रगति का आधार है। होली से पहले आयोजित इस कार्यक्रम को उन्होंने “पीडीए होली मिलन” का नाम दिया और कहा कि इससे भाईचारे और सहयोग की भावना और मजबूत होगी।
नसीमुद्दीन सिद्दीकी का राजनीतिक सफर भी काफी लंबा रहा है। वे कभी बहुजन समाज पार्टी के वरिष्ठ नेता और मायावती के करीबी माने जाते थे। बसपा सरकार में वे चार बार मंत्री रह चुके हैं। हालांकि 2017 में पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में उन्हें बसपा से निष्कासित कर दिया गया था।
इसके बाद 2018 में उन्होंने कांग्रेस का दामन थामा और अपनी नवगठित पार्टी का कांग्रेस में विलय कर दिया। लेकिन जनवरी 2026 में उन्होंने कांग्रेस से भी इस्तीफा दे दिया। ऐसे में विधानसभा चुनाव से पहले उनका समाजवादी पार्टी में शामिल होना कांग्रेस के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है, खासकर मुस्लिम वोट बैंक के लिहाज से।
सपा नेतृत्व का मानना है कि नसीमुद्दीन सिद्दीकी समाजवादी पार्टी में शामिल होने से पार्टी का सामाजिक समीकरण और मजबूत होगा। अखिलेश यादव ने कहा कि इतिहास में कई बार सामाजिक न्याय की ताकतों ने साथ आने की कोशिश की, और आने वाले समय में यह एकता और प्रभावी रूप में दिखाई देगी।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि 2027 के चुनाव से पहले इस तरह के सियासी बदलाव उत्तर प्रदेश की राजनीति में नए समीकरण बना सकते हैं।





