प्रदूषित हवा से ट्रैफिक जवानों की सेहत पर खतरा, 36% के फेफड़ों में संक्रमण के लक्षण

रायपुर, दुर्ग-भिलाई और बिलासपुर के प्रमुख चौक-चौराहों पर तैनात ट्रैफिक पुलिस जवानों की सेहत पर वायु प्रदूषण का गंभीर असर सामने आया है। जांच में पाया गया कि ड्यूटी कर रहे 36 प्रतिशत जवानों के फेफड़ों में संक्रमण के लक्षण हैं और उन्हें सांस लेने में परेशानी हो रही है। इन क्षेत्रों में पीएम 2.5 का स्तर औसतन 200 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर और पीएम 10 का स्तर 527 तक पाया गया, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों से लगभग पांच गुना अधिक है।
विशेषज्ञों की टीम ने तीन जिलों में 159 ट्रैफिक जवानों का ऑन-स्पॉट पल्मोनरी फंक्शन टेस्ट किया। जांच में कई जवानों ने सांस फूलना, खांसी, एलर्जी और लंबे समय तक सर्दी-जुकाम जैसी समस्याओं की शिकायत की। कुछ जवानों ने स्वास्थ्य जांच से इनकार भी किया और बताया कि नौकरी की मजबूरी के कारण वे ड्यूटी जारी रखे हुए हैं।
रायपुर में 52 जवानों की जांच में 22 प्रतिशत को सांस से जुड़ी समस्या और 6 प्रतिशत को गंभीर समस्या पाई गई। भिलाई में 46 जवानों की जांच में 32 प्रतिशत के फेफड़ों में संक्रमण मिला, जबकि बिलासपुर में जांचे गए 61 जवानों में से 34 प्रतिशत को फेफड़ों से संबंधित परेशानी पाई गई। विशेषज्ञों के अनुसार वाहनों का धुआं और सड़क की धूल इसके प्रमुख कारण हैं।
प्रदूषण के बढ़ते स्तर के पीछे पुराने और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की बड़ी भूमिका है। रायपुर में करीब 17 लाख वाहन हैं, जिनमें से लगभग 6 लाख वाहन 15 साल से अधिक पुराने हैं। कई वाहनों में डिजिटल नंबर प्लेट नहीं लगी है और उनकी प्रदूषण जांच भी नियमित नहीं हो पा रही है।
हवा की गुणवत्ता सुधारने के लिए केंद्र सरकार द्वारा वित्त आयोग के तहत 300 करोड़ रुपए का फंड दिया गया है, जिसमें से 191 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं। इसके अलावा नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम के तहत भी रायपुर और दुर्ग-भिलाई को प्रदूषण नियंत्रण के लिए विशेष फंड मिला है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि प्रदूषण नियंत्रण के प्रभावी उपाय नहीं किए गए तो ट्रैफिक जवानों समेत आम नागरिकों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है।





