कोरबा एंकर हत्याकांड: जिम संचालक की हार्डडिस्क में न्यूड तस्वीरें, चश्मदीद ने कोर्ट में खोले कई राज

छत्तीसगढ़ के कोरबा में एंकर सलमा सुल्ताना हत्याकांड में चश्मदीद गवाह ने कोर्ट में सनसनीखेज खुलासे किए हैं। गवाह के अनुसार आरोपी जिम संचालक मधुर साहू के कंप्यूटर की हार्डडिस्क में कई लड़कियों की न्यूड और आपत्तिजनक तस्वीरें व वीडियो क्लिप्स सेव थीं। फाइलों के नाम सामान्य रखे गए थे, जबकि कुछ फोल्डर पासवर्ड से सुरक्षित थे।
गवाह, जिसने जिम में कंप्यूटर ऑपरेटर के तौर पर काम किया था और कभी आरोपी के साथ रिश्ते में भी रही थी, ने बताया कि तस्वीरें देखने के बाद उसने संबंध खत्म करने की कोशिश की। इस पर आरोपी ने उसे धमकाया कि यदि वह दूर गई तो उसे बदनाम कर देगा।
इसी दौरान जिम में सलमा सुल्ताना का आना-जाना शुरू हुआ। बाद में दोनों लिव-इन रिलेशन में शारदा विहार स्थित घर में रहने लगे। गवाह के मुताबिक आरोपी का व्यवहार नियंत्रक और आक्रामक था। पैसों के लेन-देन और आपसी अविश्वास को लेकर दोनों के बीच अक्सर विवाद होते थे।
अक्टूबर 2018 में दशहरे के बाद की घटना का जिक्र करते हुए गवाह ने बताया कि जिस दिन हत्या हुई, उस दिन घर में तीखी बहस हुई थी। उसने दावा किया कि आरोपी ने पहले सलमा का गला दबाया, जिसे छुड़ाया गया, लेकिन कुछ देर बाद दोबारा हमला कर दिया। इस दौरान एक अन्य सहयोगी भी मौजूद था, जिसने कथित तौर पर तकिए से मुंह दबाया।
गवाह के अनुसार हत्या के बाद आरोपी ने शव को गोद में लेकर सिगरेट पीते हुए वही गीत गुनगुनाया, जिसे सलमा पसंद करती थी। उसने धमकी दी कि यदि किसी को बताया तो परिणाम गंभीर होंगे।
आरोप है कि हत्या के बाद मोबाइल फोन के जरिए लोकेशन भ्रमित करने की कोशिश की गई और स्कूटी घर पहुंचाकर गुमराह किया गया। शव को कार से ले जाकर कोहड़िया पुल के पास दफनाया गया।
करीब पांच साल तक मामला गुमशुदगी के रूप में दर्ज रहा। बाद में आरोपी के एक करीबी ने नशे की हालत में राज खोला। पुलिस ने तकनीकी जांच, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और सैटेलाइट इमेजरी की मदद से फोरलेन सड़क काटकर खुदाई करवाई। वहां से मानव कंकाल बरामद हुआ, जिसकी डीएनए जांच में पहचान सलमा सुल्ताना के रूप में हुई।
जांच में यह भी सामने आया कि सलमा के नाम पर बैंक लोन लिया गया था और उसकी किस्तें जमा हो रही थीं। इसके बाद पुलिस ने आरोपी मधुर साहू और उसके सहयोगियों को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में पैसों के विवाद और शक को हत्या का कारण बताया गया है।
मामले में जब्त हार्डडिस्क और लैपटॉप की जांच जारी है। पांच साल बाद तकनीकी साक्ष्यों और गवाह के बयान के आधार पर यह गुमशुदगी का मामला हत्या में बदल गया।





