अविश्वास नोटिस में खामियां, फिर भी स्पीकर ओम बिरला का बड़ा दिल; सुधार कर सूचीबद्ध करने के दिए निर्देश

दिल्ली। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को हटाने के लिए विपक्ष की ओर से दायर अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस में कई तकनीकी खामियां सामने आईं, जिनके आधार पर इसे खारिज किया जा सकता था। बावजूद इसके, स्पीकर ओम बिरला ने बड़ा दिल दिखाते हुए अधिकारियों को नोटिस में जरूरी सुधार कराने और इसे जल्द से जल्द सूचीबद्ध करने के निर्देश दिए। इस कदम को संसदीय मर्यादा और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता के रूप में देखा जा रहा है।
मंगलवार दोपहर लोकसभा महासचिव उत्पल कुमार सिंह को सौंपे गए नोटिस पर विपक्ष के 118 सांसदों के हस्ताक्षर थे। हालांकि, बाद में विपक्ष ने स्वयं नोटिस वापस ले लिया और तारीख में सुधार के साथ नया नोटिस प्रस्तुत किया। सूत्रों के अनुसार, पहले दिए गए नोटिस में फरवरी 2025 की घटनाओं का चार बार उल्लेख किया गया था, जो नियमों के विपरीत था। इसी कारण इसे खारिज किया जा सकता था, लेकिन अध्यक्ष ने सचिवालय को दोषपूर्ण बिंदुओं को सुधारने और आगे की प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए।
अधिकारियों का कहना है कि संशोधित नोटिस मिलने के बाद नियमों के अनुसार इसकी शीघ्र समीक्षा की जाएगी। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही में पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया है, जिसके चलते उन्होंने उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का फैसला किया। इस दौरान कांग्रेस के लोकसभा उपनेता गौरव गोगोई, मुख्य सचेतक के. सुरेश और सचेतक मोहम्मद जावेद ने कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और द्रमुक सहित कई दलों की ओर से संविधान के अनुच्छेद 94(सी) के तहत नोटिस सौंपा।
नैतिकता और संसदीय गरिमा का उदाहरण पेश करते हुए ओम बिरला ने अविश्वास प्रस्ताव के निपटारे तक लोकसभा की अध्यक्षता से स्वयं को अलग रखने का निर्णय लिया है। लोकसभा सचिवालय के अधिकारियों के मुताबिक, अध्यक्ष के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर 9 मार्च को चर्चा होने की संभावना है। यह पूरा घटनाक्रम संसद में मर्यादा, पारदर्शिता और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की अहमियत को रेखांकित करता है।





