डिजिटल धान खरीदी से छत्तीसगढ़ में किसान सशक्तिकरण की नई मिसाल, सीएम साय के नेतृत्व में बना भरोसे का मॉडल

रायपुर। धान का कटोरा कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ में धान केवल एक फसल नहीं, बल्कि किसानों की मेहनत, संस्कृति और आजीविका का आधार है। जब नीति किसान को केंद्र में रखकर बनती है, तो उसका असर केवल खेतों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे समाज और राज्य की अर्थव्यवस्था तक पहुंचता है। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में छत्तीसगढ़ शासन की तकनीक आधारित डिजिटल धान खरीदी व्यवस्था इसी सोच का सशक्त उदाहरण बनकर सामने आई है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में लागू की गई इस व्यवस्था ने धान खरीदी को केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि किसान के सम्मान, भरोसे और आत्मविश्वास का मजबूत आधार बना दिया है।

3100 रुपये समर्थन मूल्य से मजबूत हुई किसान सम्मान की नींव

राज्य सरकार द्वारा 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से समर्थन मूल्य और प्रति एकड़ 21 क्विंटल तक धान खरीदी की नीति ने किसानों को उनकी उपज का सुरक्षित और लाभकारी मूल्य सुनिश्चित किया। यह फैसला केवल आर्थिक नहीं, बल्कि किसानों के श्रम के प्रति सरकार की संवेदनशीलता का प्रतीक है।

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पहले जहां किसान बिचौलियों, देरी और भुगतान की अनिश्चितता से परेशान रहते थे, वहीं अब उन्हें न उचित मूल्य की चिंता है और न भुगतान के लिए दफ्तरों के चक्कर लगाने की मजबूरी।

धान खरीदी में बना ऐतिहासिक कीर्तिमान

खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में छत्तीसगढ़ ने धान खरीदी के क्षेत्र में देशभर में मिसाल कायम की है। 31 जनवरी 2026 तक लागू इस व्यवस्था से 25 लाख से अधिक किसानों को सीधा लाभ मिला। प्रदेश में 27 लाख से ज्यादा किसानों का पंजीकरण हुआ और “टोकन तुंहर हाथ” जैसी पारदर्शी डिजिटल प्रणाली से 92 प्रतिशत से अधिक धान की खरीदी पूरी की गई।

2,739 उपार्जन केंद्रों, 24×7 ऑनलाइन टोकन, बायोमेट्रिक सत्यापन और एग्रीस्टैक पोर्टल के जरिए 160 लाख मीट्रिक टन के लक्ष्य में से अब तक 139 लाख मीट्रिक टन से अधिक धान की खरीदी हो चुकी है।

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डिजिटल व्यवस्था से पारदर्शिता और भरोसा

डिजिटल कांटे से सटीक तौल, ऑनलाइन पंजीयन, रियल टाइम डेटा और सीधे बैंक खातों में भुगतान ने पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और समयबद्ध बना दिया। इससे नाप-तौल में गड़बड़ी, रिकॉर्ड में हेरफेर और भ्रष्टाचार की संभावनाएं लगभग खत्म हो गईं।

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उपार्जन केंद्रों पर दिखा सम्मान और संवेदनशीलता

मुख्यमंत्री साय के निर्देश पर उपार्जन केंद्रों में किसानों के लिए बैठने, पेयजल, छाया, शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित की गईं। भीड़-भाड़ से मुक्त और सुव्यवस्थित व्यवस्था ने धान बिक्री को किसानों के लिए सम्मानजनक अनुभव बना दिया।

दो दिनों में भुगतान से जीता किसानों का भरोसा

डिजिटल धान खरीदी की सबसे बड़ी उपलब्धि दो दिनों के भीतर भुगतान सुनिश्चित करना रही। इससे किसान बिना तनाव अगली फसल की तैयारी, ऋण भुगतान और घरेलू जरूरतें पूरी कर पा रहे हैं। यह बदलाव सीधे तौर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की किसान हितैषी सोच और मजबूत प्रशासनिक इच्छाशक्ति का परिणाम है।

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किसान सशक्त, राज्य सशक्त

धान खरीदी की इस नई नीति से किसानों की आय बढ़ी है, जिससे ग्रामीण बाजारों में क्रय शक्ति बढ़ी और स्थानीय व्यापार व कुटीर उद्योग को गति मिली। किसान सशक्त हुआ, गांव मजबूत हुए और राज्य की अर्थव्यवस्था को नई ताकत मिली।

आज छत्तीसगढ़ में धान खरीदी केवल सरकारी प्रक्रिया नहीं, बल्कि भरोसे और समृद्धि का उत्सव बन चुकी है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में लागू यह डिजिटल व्यवस्था देशभर के लिए किसान हितैषी सुशासन का प्रेरक मॉडल बन रही है।

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