सोशल मीडिया वीडियो के आधार पर बर्खास्त जेल प्रहरी को हाई कोर्ट से राहत, सेवा में बहाली के आदेश

रायपुर। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के आधार पर बर्खास्त किए गए जेल प्रहरी लखनलाल जायसवाल को छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। जस्टिस पीपी साहू की सिंगल बेंच ने राज्य शासन के बर्खास्तगी आदेश को रद्द करते हुए उन्हें सेवा में वापस लेने का निर्देश दिया है। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उन्हें पिछला वेतन नहीं मिलेगा, लेकिन सेवा की निरंतरता बनी रहेगी।
मामले के अनुसार, 2 अगस्त 2024 को जेल प्रहरी को एक कैदी को मेकाहारा अस्पताल में मेडिकल जांच के लिए ले जाने की जिम्मेदारी दी गई थी। जांच के बाद वे शाम करीब 4:50 बजे कैदी के साथ जेल लौट आए। इसी दौरान सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो सामने आए, जिनके आधार पर विभाग ने आरोप तय कर उन्हें बर्खास्त कर दिया।
पहला आरोप था कि अस्पताल ले जाने के दौरान प्रहरी कैदी के परिजनों के साथ रायपुर के फाफडीह इलाके के एक रेस्तरां में अनधिकृत रूप से घूमते दिखे। दूसरा आरोप यह लगाया गया कि कैदी को सुबह अस्पताल ले जाया गया, लेकिन देर शाम जेल लौटाया गया, जिससे कैदी के फरार होने का खतरा था।
याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि आरोप अस्पष्ट हैं और वीडियो फुटेज को प्रमाणित करने की वैधानिक प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। वहीं, राज्य शासन ने माना कि विभागीय जांच में न तो अस्पताल कर्मचारियों से पूछताछ की गई और न ही चिकित्सीय दस्तावेज पेश किए गए।
हाई कोर्ट ने कहा कि विभागीय जांच में वैधानिक प्रक्रिया और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन अनिवार्य है। कोर्ट ने पाया कि साक्ष्य जुटाने और जांच में गंभीर खामियां रहीं, इसलिए दी गई सजा टिकाऊ नहीं है। इसी आधार पर 31 दिसंबर 2024 और 6 अगस्त 2025 के बर्खास्तगी आदेशों को रद्द कर दिया गया।





