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90 साल पहले भी कोदो-बाजरा की फसल खाने से हुई थी 14 हाथियों की मौत, मिला जहर मारने का तरीका…

भोपाल : मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ में संक्रमित कोदो-बाजरा की फसल खाने से हाल में ही 10 हाथियों की मौत का मामला देश में पहला नहीं है। वर्ष 1933 में मद्रास (चेन्नई) के जंगल में भी 14 हाथियों की मौत संक्रमित कोदो-बाजरा की फसल (जिसे स्थानीय स्तर पर ‘वरगु’ के नाम से जाना जाता है) के खाने से ही हुई थी।

91 साल पहले 14 हाथियों की मौत

17 दिसंबर,1933 की सुबह, वन्नाथिपराई रिजर्व फारेस्ट से सटे खेतों में 11 हाथी मृत और तीन मूर्च्छित अवस्था में मिले थे। बाद में उन तीन की भी मौत हो गई थी। पोस्टमार्टम के बाद विसरा के रासायनिक परीक्षण में संक्रमित कोदो-बाजरा से हाथियों की मौत की पुष्टि किए जाने के साथ ही बताया गया था कि पका हुआ वरगु कभी-कभी जहरीला हो जाता है।

खोजने पर मिला 90 साल पुराना मामला

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में पिछले दिनों 10 हाथियों की मौत के बाद यहां के वन विशेषज्ञों ने कोदो-बाजारा से देश में पूर्व में हुईं हाथियों की मौतों के मामलों को खोजा तो यह मामला सामने आया। बाम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी के जर्नल में प्रकाशित एक रिपोर्ट में भी इसका उल्लेख किया गया है। इस रिपोर्ट में यह भी बताया गया था कि जहर का मारक बड़ी मात्रा में इमली का पानी या छाछ है।

मली के पानी से बची जान

फारेस्ट रेंजर ने रिपोर्ट दी थी कि वन्नाथिपराई रिजर्व फारेस्ट में मूर्च्छित हाथियों को इमली का पानी दिया गया तो इससे एक की जान बच गई। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि कोदो और बाजरा संभवतः जलवायु और मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों में जहरीला व्यवहार होता है।

रिपोर्ट में पशु चिकित्सक डा. लिस्बोआ के हवाले से उल्लेख है कि कोदो और बाजरा में विषाक्तता के लक्षण धतूरे से होने वाले लक्षणों से मिलते-जुलते हैं और मवेशियों में मनुष्य की तुलना में अधिक गंभीर होते हैं।

जंगली हाथियों की मौत के बाद अब कोदो खाने से 22 भैंसें बीमार

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व (बीटीआर) क्षेत्र में 10 हाथियों की मौत का मामला अभी ठंडा नहीं हुआ था कि अब मानपुर रेंज से लगे ग्राम लखनौटी और रोहनिया में कोदो खाने से 24 भैंसे बीमार हो गईं। कुछ ही घंटों के अंदर इन भैंसों की हालत बिगड़ी तो बीटीआर प्रबंधन और वन विभाग का अमला तत्काल हरकत में आया और मौके पर पहुंचे चिकित्सकों के दल ने तीन घंटे उपचार किया तो भैंसों की हालत में सुधार हो सका।

उप संचालक पशु सेवाएं डा केके उपाध्याय के अनुसार, चार पशुपालकों की 24 भैंसों ने कोदो खा लिया था। चिकित्सकों दल ने गांव जाकर उपचार किया। सभी भैंसों की हालत अब ठीक है।

उमरिया में परिवार से बिछड़ा हाथी का बच्चा तलाश कर रहा झुंड

मध्य प्रदेश के उमरिया में परिवार से बिछड़ा हाथी का बच्चा पिछले 72 घंटे के अधिक समय से झुंड को तलाश रहा है। मंगलवार की सुबह से चंदिया से सटे ग्राम जोगिया में इसकी मूवमेंट बनी हुई है। हाथी की सुरक्षा के दृष्टिगत उसके मूवमेंट को लगातार वन विभाग और पार्क अमला ट्रैक कर रहे है। सरल और सहज स्वभाव का धनी हाथी झुंड की गंध से परिवार को तलाश रहा है, शायद इसी वजह से चंदिया क्षेत्र में इसका मूवमेंट बना हुआ है।

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