भागीरथपुरा दूषित जल मामला: मदद के दावों के बीच लोगों को बोलने से रोके जाने का आरोप

इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। एक ओर प्रशासन और जनप्रतिनिधि पीड़ित परिवारों को मदद का भरोसा दिला रहे हैं, वहीं दूसरी ओर स्थानीय लोगों का आरोप है कि समर्थक उन्हें अपनी बात खुलकर रखने से रोक रहे हैं।
दूषित जल कांड में अपनों को खो चुके परिवार प्रशासन की लापरवाही से बेहद परेशान हैं। रहवासियों का कहना है कि जब वे अपनी समस्या मीडिया के सामने रखना चाहते हैं, तो कुछ लोग उन्हें धमकाने लगते हैं और सवाल करते हैं कि वे समाधान मीडिया से चाहते हैं या जनप्रतिनिधियों से। इससे यह आशंका गहराती जा रही है कि मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है।
घटना के दौरान एक मृतक के स्वजन जब अपने परिजन की मौत को दूषित पानी से जोड़ते हुए सहायता की मांग कर रहे थे, उसी समय बातचीत कर रहे परिवार को बोलने से रोका गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई परिवारों के साथ ऐसा व्यवहार किया गया, जिससे उनमें आक्रोश बढ़ गया है।
दूसरी ओर, जनप्रतिनिधियों द्वारा आर्थिक सहायता देने के प्रयासों को लेकर भी नाराजगी देखने को मिली। आठ मृतकों के स्वजनों को सहायता राशि देने की कोशिश के दौरान छह माह के एक बच्चे के माता-पिता ने चेक लेने से इनकार कर दिया। उनका कहना था कि उनका बच्चा वर्षों की मन्नत के बाद जन्मा था और अब किसी भी तरह की आर्थिक मदद उनके नुकसान की भरपाई नहीं कर सकती।
इसी तरह एक अन्य मृतक के परिवार ने भी पहले सहायता राशि लेने से मना कर दिया। परिवार का कहना है कि उनके परिजन अभी अस्पताल में भर्ती हैं और इलाज को लेकर गंभीर चिंताएं बनी हुई हैं। महिलाओं ने आरोप लगाया कि वे अपनी पीड़ा लेकर मिलने गईं, लेकिन उन्हें मिलने भी नहीं दिया गया।
भागीरथपुरा में दूषित पानी के कारण लोगों में भय और आक्रोश का माहौल है। रहवासी लगातार जवाबदेही तय करने और स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।





