CHHATTISGARH: जशपुर का नया LOGO बनेगा जिले की नई पहचान, सरकारी दस्तावेजों में होगा समावेश

JASHPUR: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 25 दिसंबर 2024 को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी के जन्मदिवस और सुशासन दिवस के अवसर पर जशपुर जिले के कुनकुरी स्थित सलियाटोली में एक भव्य समारोह का आयोजन किया। इस समारोह में मुख्यमंत्री ने जशपुर जिले का विशेष लोगो लॉन्च किया, जिसे जिले की पहचान के रूप में अपनाया जाएगा। यह नया लोगो जिले में चलने वाली सरकारी योजनाओं और शासकीय पत्रों में प्रयोग किया जाएगा।
लोगो को डिज़ाइन करते वक्त जशपुर जिले की प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक विविधता को ध्यान में रखा गया है। लोगो का आकार वृत्ताकार है, जो एकता और सामंजस्य का प्रतीक है। इसमें हरे रंग का प्रयोग किया गया है, जो जशपुर की हरी-भरी हरियाली और समृद्ध प्राकृतिक वातावरण को दर्शाता है। इस लोगो में जशपुर के प्रसिद्ध जलप्रपातों और पहाड़ों से प्रवाहित होते जल को भी दर्शाया गया है, जो क्षेत्र की जलवायु और प्रकृति की सुंदरता को प्रदर्शित करता है।
लोगो में हाथियों और उनके शावकों की छवि भी शामिल है, जो जशपुर में सदियों से विचरण कर रहे हाथियों के लिए अनुकूल परिस्थितियों को दर्शाती है। यह हाथी जशपुर के वन्यजीवों और जैव विविधता को उजागर करता है। इसके अतिरिक्त, लोगो में चाय बगानों के प्रतीक भी दिखाए गए हैं, जो जशपुर के प्रसिद्ध चाय बगानों, जैसे सरुडीह, आदि की पहचान को प्रदर्शित करते हैं। चाय बगान जशपुर की कृषि और उद्योग का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, और लोगो में इसे शामिल करना क्षेत्र की पहचान को और भी स्पष्ट करता है।
लोगो में मधेश्वर पहाड़ भी शामिल
लोगो में एक और महत्वपूर्ण तत्व है – मधेश्वर पहाड़, जिसे जशपुर का प्रमुख पर्यटन स्थल माना जाता है। मधेश्वर पहाड़ को विश्व का सबसे बड़ा प्राकृतिक शिवलिंग माना जाता है, और यह जशपुर जिले का एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर स्थल है। लोगो में मधेश्वर पहाड़ को प्रमुख स्थान दिया गया है, जो जिले के धार्मिक और पर्यटन स्थल की पहचान को दर्शाता है।
इसके अलावा, लोगो में “जशपुर” शब्द को गेरुआ रंग में लिखा गया है, जो इस क्षेत्र की समृद्ध आदिवासी धरोहर और सांस्कृतिक महत्व को उजागर करता है। गेरुआ रंग भारतीय संस्कृति में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है, और यह आदिवासी समुदायों की पहचान और उनकी जीवनशैली को सम्मानित करता है। लोगो में “जशपुर” के “एस” का आकार एक सांप के रूप में डिज़ाइन किया गया है, जो जशपुर जिले के तपकरा क्षेत्र की विशेषता को दर्शाता है। तपकरा क्षेत्र को “नागलोक” के नाम से भी जाना जाता है, और यह क्षेत्र अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर के लिए प्रसिद्ध है।
लोगो में “पी” के ऊपर चाय की पत्तियाँ दर्शाई गई हैं, जो जशपुर के चाय बगानों से जुड़ी हुई हैं। यह चाय बगान न केवल जिले की कृषि का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, बल्कि यह जशपुर की आर्थिक समृद्धि में भी योगदान करते हैं। चाय बगान क्षेत्र में रोजगार का एक बड़ा स्रोत बनते हैं और यह क्षेत्र की पहचान का अहम हिस्सा हैं।
इसके अलावा, लोगो में कर्मा नृत्य और जशपुर की प्रसिद्ध कला रूपों से प्रेरित कलात्मक तत्व भी शामिल किए गए हैं। कर्मा नृत्य, जो कि जशपुर के आदिवासी समुदायों की सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा है, लोगो में सांस्कृतिक विविधता और परंपरा की पहचान को दर्शाता है। इस नृत्य के प्रतीक को लोगो में शामिल करने से जशपुर की सांस्कृतिक विरासत और आदिवासी समुदायों की जीवनशैली का सम्मान किया गया है।
इस तरह, जशपुर जिले का नया लोगो न केवल जिले की प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक विविधता को उजागर करता है, बल्कि यह जिले के समृद्ध इतिहास, धार्मिक धरोहर, और पारंपरिक जीवनशैली की भी साक्षी है। मुख्यमंत्री के इस कदम से जिले की पहचान को एक नई दिशा मिलेगी, और यह लोगो जशपुर के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रतीक बनेगा। यह लोगो सरकारी योजनाओं, शासकीय पत्रों, और जशपुर के सभी प्रशासनिक कामकाज में इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे जिले की पहचान और भी मजबूत होगी।





