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किसानों, मितानिनों और शहरी पट्टाधारियों को मिली बड़ी राहत, नगरीय निकायों में पिछड़े वर्ग को आरक्षण

रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सफल नेतृत्व में साय सरकार का एक साल पूरा हो गया। प्रदेश खुशहाली से भर गया है। साय सरकार ने युवा, महिलाओं और किसानों के लिए सराहनीय काम किया। किसानों से प्रति एकड़ 21 क्विंटल 3100 रुपये की दर से खरीदने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं।सरकार ने मंडी फीस के स्थान पर अब ‘मंडी फीस या कृषक कल्याण शुल्क‘ शब्द जोड़ा जाना प्रस्तावित किया है। कृषक कल्याणकारी गतिविधियों के लिए मंडी बोर्ड अपनी सकल वार्षिक आय की 10 प्रतिशत राशि छत्तीसगढ़ राज्य कृषक कल्याण निधि में जमा करेगा। इस निधि का उपयोग नियमों में शामिल प्रयोजनों के लिए किया जा सकेगा।

छत्तीसगढ़ राज्य के नगरीय क्षेत्रों में शासकीय भूमि के आबंटन, अतिक्रमित भूमि के व्यवस्थापन और भूमि स्वामी को हक प्रदान करने के संबंध में मंत्रिपरिषद ने महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए इस संबंध में पूर्व में जारी निर्देश और परिपत्रों को निरस्त कर दिया है। इसमें राजस्व और आपदा प्रबंधन विभाग ने नगरीय क्षेत्रों में अतिक्रमित भूमि के व्यवस्थापन, शासकीय भूमि के आबंटन, वार्षिक भू-भाटक के निर्धारण और वसूली प्रक्रिया संबंधी 11 सितम्बर 2019 को जारी परिपत्र, नगरीय क्षेत्रों में प्रदत्त स्थायी पट्टों का भूमिस्वामी हक प्रदान किए जाने संबंधी 26 अक्टूबर 2019 को जारी परिपत्र, नजूल के स्थायी पट्टों की भूमि को भूमिस्वामी हक में परिवर्तित किए जाने के लिए 20 मई 2020 को जारी परिपत्र और नगरीय क्षेत्रों में शासकीय भूमि के आबंटन, अतिक्रमित भूमि के व्यवस्थापन और भूमि स्वामी हक प्रदान करने के संबंध में जारी परिपत्र शामिल हैं।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की घोषणा के अनुसार पंचायत सचिवों के शासकीयकरण के लिए समिति गठित किया जाएगा। प्रदेश की मितानिनों को अब हर माह प्रोत्साहन राशि के लिए ऑनलाइन भुगतान की व्यवस्था लागू की जाएगी। छत्तीसगढ़ में भारतीय विदेश व्यापार संस्थान कोलकाता (आई आई एफ टी) के निर्यात सुविधा केंद्र और भारतीय उद्यमिता विकास संस्थान अहमदाबाद के प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए।छत्तीसगढ़ के स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के प्रदर्शन पर नजर रखने के लिए राजधानी रायपुर में विद्या समीक्षा केंद्र स्थापित किया गया है। स्कूलों के साथ-साथ उनमें पढ़ने वाले प्रत्येक बच्चे के प्रदर्शन पर भी अब सीधी नजर रखी जाएगी। सॉफ्टवेयर और मोबाइल एप्प का विकास और कॉल सेंटर के माध्यम से मॉनिटरिंग आई.आई.टी. भिलाई के सहयोग से किया जा रहा है। पबिया, पविया, पवीया जाति को अनुसूचित जनजातियों की सूची में पाव जाति के साथ शामिल करने की संवेदनशील पहल की जाएगी। मुख्यमंत्री ने इन जातियों का नृजातीय अध्ययन प्रतिवेदन अनुशंसा सहित भारत सरकार के जनजाति कार्य मंत्रालय को आगे की कार्यवाही के लिए भेजा है|

प्रदेश के 13 बड़े शहरों में बनेगी नालंदा की तर्ज पर लाइब्रेरी

राजधानी रायपुर के नालंदा परिसर की तर्ज पर प्रदेश के 13 नगरीय निकायों में लाइब्रेरी निर्माण के लिए वित्त विभाग से हरी झंडी। लाइब्रेरी को ‘नॉलेज बेस्ड सोसायटी’ यानी ‘ज्ञान आधारित समाज’ के प्रतीक के रूप में प्रदेश के अलग-अलग स्थानों में स्थापित किया जाएगा। 85 करोड़ 42 लाख रुपए की लागत से प्रदेश के 4 नगरीय निकायों में 500 सीटर और 9 नगरीय निकायों में 200 सीटर लाइब्रेरी का निर्माण किया जाएगा।

निकायों में पिछड़ा वर्ग को आरक्षण का बड़ा निर्णय

त्रि-स्तरीय पंचायत और नगरीय निकाय के चुनाव में अन्य पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग के प्रथम प्रतिवेदन और अनुशंसा अनुसार आरक्षण प्रदान किए जाने का निर्णय। इसके तहत स्थानीय निकायों में आरक्षण को एकमुश्त सीमा 25 प्रतिशत को शिथिल कर अन्य पिछड़ा वर्ग की जनसंख्या के अनुपात में 50 प्रतिशत आरक्षण की अधिकतम सीमा तक आरक्षण प्रदान किया जाएगा। ऐसे निकाय जहां पर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति का आरक्षण कुल मिलाकर 50 प्रतिशत या उससे ज्यादा है। वहां अन्य पिछड़ा वर्ग का आरक्षण उस निकाय में शून्य होगा। यदि अनुसूचित जाति, जनजाति का आरक्षण निकाय में 50 प्रतिशत से कम है तो उस निकाय में अधिकतम 50 प्रतिशत की सीमा तक अन्य पिछड़ा वर्ग का आरक्षण होगा परंतु यह आरक्षण उस निकाय की अन्य पिछड़ा वर्ग के आबादी से अधिक नहीं होगा। निकाय के जिन पदों के आरक्षण राज्य स्तर से तय होते हैं जैसे जिला पंचायत अध्यक्ष, नगर निगम महापौर, नगर पालिका अध्यक्ष इत्यादि। इन पदों के लिए ऐसे निकायों की कुल जनसंख्या के आधार पर उपरोक्त सिद्धांत का पालन करते हुए आरक्षित पदों की संख्या तय की जाएगी।

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