आयुर्वेदिक मालिश (अभ्यंग/अभ्यंगम) क्या है? पारंपरिक आयुर्वेदिक मालिश को अभ्यंग या अभ्यंगम कहा जाता है। इसमें हर्बल तेलों से पूरे शरीर की मालिश की जाती है, जिससे स्वास्थ्य में सुधार और दीर्घायु प्राप्त होती है। यह आयुर्वेद की एक प्रमुख दैनिक दिनचर्या (दिनचर्या) मानी जाती है।

अभ्यंगम के स्वास्थ्य लाभ – उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करता है – थकान कम करता है – वात दोष को संतुलित करता है – रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है – मांसपेशियों और जोड़ों के दर्द में राहत देता है – रक्त परिसंचरण और त्वचा की गुणवत्ता में सुधार करता है – मानसिक तनाव और अनिद्रा को कम करता है

केरल आयुर्वेदिक मालिश कैसे की जाती है? – इसे आमतौर पर 7 शास्त्रीय स्थितियों में किया जाता है (जैसे बैठना, लेटना आदि)। – मालिश की दिशा, दबाव और तकनीक व्यक्ति की प्रकृति (बॉडी टाइप) और स्थिति के अनुसार तय की जाती है। – मालिश एक या दो प्रशिक्षित चिकित्सकों द्वारा की जा सकती है।

आयुर्वेदिक मालिश के प्रकार i) सर्वांग अभ्यंगम (पूर्ण शरीर की मालिश)  – पूरे शरीर पर गर्म औषधीय तेल से मालिश की जाती है। – 7 अलग-अलग पोजिशन में किया जाता है। – मांसपेशियों को आराम और रक्त संचार में सुधार करता है।

एकांग अभ्यंगम (आंशिक मालिश)  – शरीर के केवल प्रभावित हिस्से पर की जाती है। – दर्द, सूजन और मांसपेशियों की कमजोरी में लाभकारी।

पादाभ्यंगम (पैरों की मालिश)  – पैरों के तंत्रिका सिरों को उत्तेजित करती है। – थकान, सूजन और नींद की समस्याओं में मदद करती है। – प्रजनन क्षमता को भी बढ़ावा देती है।

आयुर्वेदिक मालिश से किन बीमारियों का प्रबंधन हो सकता है? – चिंता, तनाव और अवसाद – अनिद्रा – जोड़ों का दर्द – मांसपेशियों की जकड़न – थकान और शारीरिक कमजोरी

आयुर्वेदिक मालिश कहाँ करवाएं  यह सेवा कई आयुर्वेदिक क्लीनिक और वेलनेस सेंटर में उपलब्ध है।